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आज भी तू वही कुमारी हो

आज भी तू वही कुमारी हो
छोटी कलियों पे फूल भारी हो ।
पहले तो गन्ध भीनी लगती थी
आज तू महक की पिटारी हो ।।

छोटे जुगनू पडे कही फीके
उघते तारे लगे कही पीके ।
सारे अम्बर मे ज्योती तेरी है
बडी प्यारी लगे कही हीके ।।

चाँद उतरा है दूर से जैसे
चमके मुखड़ा कपूर के जैसे ।
होठ लाली अलक काली
कान बाली खजूर के जैसे ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र

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2 Comments

Renu

22-Mar-2023 08:31 PM

👍👍💐

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बहुत खूब

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